भारत में न्यायालयों के प्रकार? – Types of Court in India?
भारत में न्यायालयों के प्रकार? – Types of Court in India?
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
उच्च न्यायालय (High Court)
जिला और अधीनस्थ न्यायालय
ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय
फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court)
लोक अदालत (Public Court)
अब इन सभी न्यायालय (कोर्ट) को विस्तार से समझते हैं –
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
यह देश का शीर्ष न्यायालय है इसका मुखिया प्रधान न्यायाधीश होता है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना अट्ठाईस जनवरी उन्नीस सौ पच्चास (28 -01 -1950) को हुई थी। वर्तमान में डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल पैंसठ वर्ष (65) की आयु तक का होता है। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चौतीस (34) न्यायाधीश और एक (1) मुख्य न्यायाधीश हैं। देश की विभिन्न सरकारों के बीच विवादों का निपटारा भी सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में किया जाता है। यह पुरे भारत के किसी भी कोर्ट के कार्यो में हस्तक्षेप कर सकता है।
उच्च न्यायालय (High Court)
भारत में कुल पच्चीस (25) उच्च न्यायालय (High Court) हैं। यह केवल अपने राज्य स्तर पर सीमित होते हैं ओर अपने राज्यों के विवादों को निपटारा करता हैं। उच्च न्यायालय (High Court) का मुख्य काम निचली कोर्ट की अपील और रिट याचिका का निपटारा करना होता है। कोलकाता उच्च न्यायालय (High Court) देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है। ओर भारत का सबसे नया उच्च न्यायालय (High Court) आंध्र प्रदेश के अमरावती में स्थित आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) है।
जिला और अधीनस्थ न्यायालय
जिला और अधीनस्थ न्यायालय को देश के जिला स्तर तक न्याय देने के लिए बनाया गया है। इसलिए इसको जिला और अधीनस्थ न्यायालय कहा जाता है। इसमें जिला न्यायाधीश सभी सिविल मामलों, फॅमिली मैटर और आपराधिक मुकदमो की सुनवाई करते हैं। सभी जिला और अधीनस्थ न्यायालय उच्च न्यायालय (High Court) के नियंत्रण में काम करते हैं।
ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय
ऐसा एक व्यक्ति या संस्था जिसके पास न्यायिक काम करने का अधिकार हो उसको ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय कहते है। ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय को कुछ खास विषयों के मामले को देखने के लिए बनाया गया है। इसमें सुनवाई तेज होती है और फ़ैसले भी जल्दी किए जाते हैं। भारत में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अनुसार कुल अठारह (18) ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court)
फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court) में केस की सुनवाई तेज़ी से होती है। यह सेशन कोर्ट की तरह ही होती है। इसकी स्थापना सन 2000 में की गई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court) का मुख्य उदेश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा का निपटारा जल्दी से जल्दी करना है।
लोक अदालत (Public Court)
लोक अदालत (Public Court) एक बहुत ही मह्त्वपूर्ण कोर्ट है। इसमें मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामले, वैवाहिक और पारिवारिक मामले, भूमि अधिग्रहण के विवाद और विभाजन के दावे जैसे मामले का निपटारा समझौते के आधार पर होता है। इसमें अच्छी बात ये है, की इसमें वकील की भी जरुरत नहीं होती। जिससे आम लोगो का पैसा ओर टाइम दोनों बच जाता है ओर समझौते के आधार पर फैसला भी जल्दी हो जाता है।
Question:-
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना कब हुई थी?
भारत में कितने उच्च न्यायालय (High Court) है?
भारत में कितने ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय है?
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